WHATSAPPWISH.COM

Show your loved ones that you wish them well

New Updated Status

माया छाया एक सी, बिरला जानै कोय ।
भागत के पीछे लगे, सन्मुख भागे सोय ।।

माया और छाया एक समान है इसको कोई बिरला ही जानता है ये अज्ञानियों के पीछे लग जाती है तथा ज्ञानियों से दूर भाग जाती है ।

Kabir Ke Dohe
Shared 84 Times Today
मूर्ख मूढ़ कुकर्मियों, नख-सिख पाखर आहि ।
बन्धन कारा का करे, जब बाँधन लागे ताहि ।।

जिस मनुष्य को समझाने तथा पढ़ाने से भी कुछ ज्ञान न हो उस मनुष्य को समझाना भी अच्छा नहीं क्योंकि उस पर आपकी बातों का कुछ भी प्रभाव नहीं होगा ।

Kabir Ke Dohe
Shared 238 Times Today
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
माँगन-मरण समान है, मति माँगो कोई भीख ।
माँगन ते मरना भला, यह सतगुरु की सीख ।।

माँगना मरने के बराबर है इसलिए किसी से भीख मत माँगो । सतगुरु कहते हैं (शिक्षा है) कि माँगने से मर जाना बेहतर है ।

Kabir Ke Dohe
Shared 332 Times Today
लूट सके तो लूट ले, सन्त नाम की लूट ।
पीछे फिर पछताओगे, प्रान जाहिं जब छूट ।।

भगवान के नाम का स्मरण कर ले नहीं तो समय व्यतीत हो जाने पर पश्चात्ताप करने से कुछ लाभ नहीं है । कबीर जी कहते हैं कि हे जीव, तू भगवान का स्मरण कर ले नहीं तो मृत्यु के समय तथा उपरांत पश्चात्ताप करना पड़ेगा अर्थात नरक के दुसह दुखों को भोगना पड़ेगा ।

Kabir Ke Dohe
Shared 268 Times Today
लघुता से प्रभुता मिले, प्रभुता से प्रभू दूरि ।
चींटी ले शक्कर चली, हाथी के सिर धूरि ।।

कबीरदास जी कहते हैं कि लघुता से प्रभुता मिलती है । और प्रभुता से प्रभु दूर रहते हैं, जिस प्रकार छोटी-सी चींटी लघुता के कारण शक्कर पाती है और हाथी के सिर पर धूल पड़ती है ।

Kabir Ke Dohe
Shared 133 Times Today
वृक्ष बोला पात से, सुन पत्ते मेरी बात ।
इस घर की यह रीति है, एक आवत एक जात ।।

वृक्ष पत्ते को उत्तर देता हुआ कहता है कि हे पत्ते, इस संसार में यही प्रथा प्रचलित है कि जिसने जन्म लिया है वह अवश्य मृत्यु को प्राप्त होता है ।

Kabir Ke Dohe
Shared 93 Times Today
साधुन के सत संग से, थर-थर काँपे देह ।
कबहूँ भाव-कुभाव लें, मन मिट जाय स्नेह ।।

मन के भावों और कुभावों से उसका प्रेम नष्ट हो जाता है तथा साधुओं के संग से शरीर थर-थर काँपता है, ये कम्पन पाप प्रवृत्तियों के कारण होती है । अर्थात सात्विक भावों के मन में उत्पन्न होने पर बुरे भावों की शनैःशनैः कमी हो जाती है और अंत में उनके लिए हृदय में स्थान शेष नहीं रहता ।

Kabir Ke Dohe
Shared 124 Times Today
सुमिरन से मन लाइये, जैसे कामी काम ।
एक पलक बिसरे नहीं, निश दिन आठौ याम ।।

कबीरदास जी कहते हैं कि जिस प्रकार कामी मनुष्य अपने काम में प्रवृत रहता है । अपनी प्रेमिका का ध्यान आठों पहर करता है उसी प्रकार हे प्राणी! तू अपने मन को भगवत स्मरण में लगा दे ।

Kabir Ke Dohe
Shared 257 Times Today
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
साधु गाँठी न बाँधई, उदर समाता लेय ।
आगे-पीछे हरि खड़े जब भोगे तब देय ।।

साधु गाँठ नहीं बाँधता वह तो पेट भर अन्न लेता है क्योंकि वह जानता है आगे पीछे ईश्वर खड़े हैं । भाव यह है कि परमात्मा सर्वव्यापी है जीव जब माँगता है तब वह उसे देता है ।

Kabir Ke Dohe
Shared 259 Times Today
आग जो लागी समुद्र में, धुआँ न प्रकट होय ।
सो जाने जो जरमुआ, जाकी लाई होय ।।

जब मन में प्रेम की अग्नि लग जाती है तो दूसरा उसे क्यों जाने ? या तो वह जानता है जिसके मन से अग्नि लगी है या आग लगाने वाला जानता है ।

Kabir Ke Dohe
Shared 146 Times Today

Total Files (3018) Page 100 of 302

All Category's (177)

A B C D E F G H I J K L M N O P Q R S T U V W X Y Z ALL
Nasa Quotes (8) Quotes By Neil Armstrong (8) Audience Engagement Quotes (9) Advertising Quotes (8) Quotes By Jennifer Lopez (12) Quotes By Donald Trump (6) Retirement Wishes (15) New Year Wishes In Urdu (11) Guru Ravidas Jayanti (12) Happy New Year Wishes (26)
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT